अंपायरिंग सिग्नल्स गाइड: अंपायर के हर इशारे का मतलब, सरल हिंदी में
अंपायर के इशारे क्यों ज़रूरी हैं
क्रिकेट में अंपायर का इशारा ही फैसला होता है। बड़े स्टेडियम में आवाज़ दूर तक नहीं पहुंचती, इसलिए अंपायर हाथों से संकेत देता है ताकि खिलाड़ी, स्कोरर और दर्शक सब एक साथ फैसला समझ सकें। हर संकेत का एक निश्चित मतलब होता है और खिलाड़ी इसे देखकर ही अगला कदम उठाते हैं। जो दर्शक इन इशारों को समझ लेता है, उसे मैच देखने में ज़्यादा मज़ा आता है, क्योंकि उसे हर फैसले का तुरंत पता चल जाता है।
चौका और छक्का
जब बॉल बाउंड्री को छूकर या उसके पार जाकर रुकती है और बल्लेबाज़ ने उसे बैट से खेला हो, तो चार रन मिलते हैं। अंपायर एक हाथ को एक तरफ से दूसरी तरफ लहराता है, जैसे ज़मीन को साफ कर रहा हो। यह संकेत बताता है कि बॉल ने बाउंड्री पार की है और चार रन जुड़ गए हैं। अगर बॉल बिना बाउंस के या बाउंस के बाद सीधा बाउंड्री पार करे, तब भी चौका ही मिलता है, बस फर्क इतना है कि बॉल ने ज़मीन छुई या नहीं।
आउट के संकेत
आउट का सबसे मशहूर संकेत उंगली उठाना है। अंपायर एक हाथ की उंगली ऊपर उठाता है, जिसका मतलब है कि बल्लेबाज़ आउट है। यह संकेत बोल्ड, कॉट, LBW, स्टंप्ड और हिट विकेट जैसे कई तरह के आउट के लिए एक जैसा होता है। दर्शक को यह पता करने के लिए स्कोरबोर्ड या कमेंट्री देखनी पड़ती है कि आउट किस तरीके से हुआ। लेकिन अंपायर का उंगली उठाना ही अंतिम फैसला होता है।
वाइड और नो बॉल के संकेत
वाइड बॉल के लिए अंपायर दोनों हाथ कंधे की ऊंचाई तक फैलाता है। यह संकेत बताता है कि बॉल बल्लेबाज़ की पहुंच से बाहर थी और बैटिंग टीम को एक एक्स्ट्रा रन मिलेगा। वाइड का संकेत देखते ही स्कोरर एक्स्ट्रा रन दर्ज कर लेता है और गेंदबाज़ समझ जाता है कि उसे वो बॉल दोबारा डालनी होगी।
बाय, लेग बाय और डेड बॉल
कभी कभी बॉल बल्लेबाज़ के बैट या शरीर से लगे बिना निकल जाती है और बल्लेबाज़ रन भाग लेते हैं। इन रन को बाय कहा जाता है। इसके लिए अंपायर एक हाथ सर के ऊपर उठाकर हथेली खोलता है। अगर बॉल बल्लेबाज़ के शरीर से लगकर जाए और रन बने, तो उसे लेग बाय कहा जाता है। लेग बाय के लिए अंपायर एक हाथ से अपने घुटने को छूता है। दोनों ही रन बैटिंग टीम के खाते में जुड़ते हैं, लेकिन बल्लेबाज़ के निजी स्कोर में नहीं।
DRS और आज के नए संकेत
आधुनिक क्रिकेट में DRS, यानी Decision Review System, का संकेत भी आम हो गया है। जब कोई टीम अंपायर के फैसले को चुनौती देती है, तो कप्तान या बल्लेबाज़ हाथ से अंग्रेज़ी के T अक्षर का संकेत बनाता है। इसके बाद अंपायर भी TV स्क्रीन वाला संकेत देकर फैसला थर्ड अंपायर को भेज देता है। थर्ड अंपायर के फैसले के बाद मैदान के अंपायर अंतिम संकेत देता है, चाहे वो आउट हो या नॉट आउट।
दर्शक के लिए आसान तरीका
इन संकेतों को याद रखने का सबसे आसान तरीका यह है कि इन्हें तीन हिस्सों में बांट लें। पहला हिस्सा रन के संकेत हैं, जैसे चौका, छक्का, बाय और लेग बाय। दूसरा हिस्सा गलती के संकेत हैं, जैसे वाइड और नो बॉल। तीसरा हिस्सा फैसले के संकेत हैं, जैसे आउट, नॉट आउट और थर्ड अंपायर। एक मैच में इन संकेतों पर ध्यान देने से आप धीरे धीरे इन्हें बिना सोचे समझने लगेंगे।
अंतिम बात
अंपायर के संकेत क्रिकेट की भाषा हैं। ये भाषा बिना शब्दों के पूरा मैच सुना देती है। चौके से लेकर DRS तक, हर संकेत का अपना मतलब और अपनी जगह है। इन्हें समझना मुश्किल नहीं है, बस थोड़ा ध्यान चाहिए। अगली बार जब आप मैच देखें, तो अंपायर के हाथों को भी उतनी ही तवज्जो दें जितनी बल्लेबाज़ के शॉट को देते हैं।