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‘मांकडिंग’ विवाद: नियम क्या कहता है, इतिहास क्या बताता है

October 4, 2026 · Shah
‘मांकडिंग’ विवाद: नियम क्या कहता है, इतिहास क्या बताता है

क्रिकेट में कुछ ही चीज़ें ‘मांकडिंग’ जितनी बहस छेड़ती हैं। एक रन-आउट, जो नियमों के मुताबिक पूरी तरह वैध है, फिर भी इसे लेकर खिलाड़ी, कमेंटेटर और फैंस दो खेमों में बंट जाते हैं। आइए समझते हैं कि मांकडिंग है क्या, इसका नाम कैसे पड़ा और नियम असल में क्या कहता है।

मांकडिंग क्या होती है?

जब गेंदबाज़ गेंद फेंकने से पहले देखता है कि नॉन-स्ट्राइकर छोर का बल्लेबाज़ क्रीज़ से बाहर निकल आया है, तो वह गेंद फेंके बिना गिल्लियां बिखेरकर उसे रन-आउट कर सकता है। इसी को आम भाषा में ‘मांकडिंग’ कहते हैं।

नाम कहां से आया?

यह नाम भारत के महान ऑलराउंडर विनू मांकड़ के नाम पर पड़ा। 1947-48 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मांकड़ ने सिडनी टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ बिल ब्राउन को इसी तरह रन-आउट किया था — एक बार चेतावनी देने के बाद, दूसरी बार अपील पर। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने इसे खेल-भावना के खिलाफ बताया और इस तरीके का नाम ही ‘मांकडेड’ रख दिया। विडंबना यह है कि खुद डॉन ब्रैडमैन ने बाद में कहा था कि नियमों के हिसाब से मांकड़ पूरी तरह सही थे।

नियम क्या कहता है?

MCC के क्रिकेट नियमों में यह प्रावधान लंबे समय तक “अनुचित खेल” (Unfair Play) वाले खंड में था, जिससे यह धारणा बनती रही कि यह कोई ‘चालबाज़ी’ है। लेकिन 2022 में MCC ने नियमों को साफ किया और इसे रन-आउट के सामान्य खंड (नियम 38) में डाल दिया — यानी अब यह आधिकारिक रूप से उतना ही वैध रन-आउट है, जितना कोई और।

शर्त सिर्फ इतनी है: गेंदबाज़ को यह गेंद फेंकने की प्रक्रिया के दौरान, गेंद रिलीज़ होने से पहले करना होगा।

सबसे चर्चित मामले

  • IPL 2019: रविचंद्रन अश्विन ने जोस बटलर को इसी तरह आउट किया। बहस इतनी बढ़ी कि यह IPL सीज़न की सबसे बड़ी सुर्खी बन गया।
  • लॉर्ड्स 2022: दीप्ति शर्मा ने इंग्लैंड की चार्ली डीन को वनडे में रन-आउट किया। इंग्लैंड खेमा नाराज़ था, लेकिन ICC और MCC दोनों ने इसे नियमसम्मत ठहराया।
  • अंडर-19 वर्ल्ड कप 2016: वेस्टइंडीज़ के कीमो पॉल ने ज़िम्बाब्वे के रिचर्ड एनगारावा को निर्णायक मौकों पर आउट किया था।

दोनों पक्षों की दलील

समर्थकों का कहना है: नॉन-स्ट्राइकर का जल्दी क्रीज़ छोड़ना खुद नियमों का उल्लंघन है — वह चोरी से बढ़त ले रहा है। गेंदबाज़ को इसका फायदा उठाने का पूरा हक है, और चेतावनी देना अनिवार्य नहीं।

विरोधियों का तर्क है: क्रिकेट ‘जेंटलमैन गेम’ है, और बिना चेतावनी के ऐसा आउट करना खेल-भावना के खिलाफ है। उनका मानना है कि पहले चेतावनी दी जानी चाहिए।

निष्कर्ष

नियमों की किताब में मांकडिंग पूरी तरह वैध है — यह अब “अनुचित खेल” भी नहीं कहलाती। लेकिन मैदान पर इसका इस्तेमाल आज भी बहस छेड़ देता है। शायद असली सवाल नियम का नहीं, बल्कि यह है कि क्रिकेट को हम किस भावना से खेलना चाहते हैं — और इस सवाल का जवाब हर दौर में अलग-अलग मिलता रहेगा।