पहले लॉर्ड्स टेस्ट में टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत, इंग्लैंड को 270 रन से हराया
क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान ने अपने 142 साल के लंबे इतिहास में पहली बार किसी महिला टेस्ट मैच की मेजबानी की, और भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इस ऐतिहासिक अवसर को अपनी ऐतिहासिक जीत से हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया। हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में भारतीय टीम ने खेल के हर विभाग-बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग में मेजबान इंग्लैंड पर पूरी तरह अपना दबदबा बनाए रखा। टीम इंडिया ने इस एकमात्र टेस्ट मुकाबले में इंग्लैंड को 270 रनों के विशाल अंतर से शिकस्त देकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। रनों के लिहाज से यह भारतीय महिला टेस्ट इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी जीत है। इससे पहले साल 2023 में भारत ने इंग्लैंड को ही 347 रनों से मात दी थी। इस जीत के साथ ही भारत का इंग्लैंड की धरती पर अजेय रहने का रिकॉर्ड भी बरकरार रहा, जहां टीम ने अब तक खेले 11 टेस्ट मैचों में से 3 में जीत हासिल की है जबकि 8 मुकाबले ड्रॉ रहे हैं।
क्रांति की जादुई गेंदबाजी
इस ऐतिहासिक टेस्ट में भारतीय खिलाड़ियों ने कई व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स भी अपने नाम किए। उप-कप्तान स्मृति मंधाना ने मैच की दोनों पारियों में अर्धशतक जड़कर भारतीय बल्लेबाजी की मजबूत नींव रखी। उन्होंने पहली पारी में शानदार 83 और दूसरी पारी में 70 रनों का योगदान दिया। वहीं, विकेटकीपर बल्लेबाज यस्तिका भाटिया लॉर्ड्स के इस मैदान पर टेस्ट शतक लगाने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर बन गईं, जिन्होंने दूसरी पारी में 113 रनों की बेमिसाल पारी खेली। गेंदबाजी के मोर्चे पर क्रांति गौड़ ने अपनी जादुई स्विंग का प्रदर्शन करते हुए पहली पारी में 5 विकेट चटकाए, जिससे इंग्लैंड की टीम महज 170 रनों पर ढेर हो गई और भारत को 115 रनों की महत्वपूर्ण बढ़त मिली। वह लॉर्ड्स में 5 विकेट लेने वाली पहली महिला गेंदबाज बनीं और उन्हें इस शानदार प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।
भारतीय स्पिनरों का घातक वार
मैच के चौथे दिन भारत की स्पिन तिकड़ी ने इंग्लैंड के बल्लेबाजी क्रम को पूरी तरह घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। 457 रनों के बेहद मुश्किल लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही और टीम ने अपने शुरुआती विकेट बेहद सस्ते में गंवा दिए। एमी जोन्स (54) और सोफी एक्लेस्टोन (50) ने अर्धशतक लगाकर संघर्ष की कोशिश जरूर की, लेकिन वे सिर्फ हार के अंतर को ही कम कर सकीं। भारत की ओर से फिरकी गेंदबाज स्नेह राणा ने घातक गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट चटकाए, जबकि सयाली सतघारे, क्रांति गौड़ और दीप्ति शर्मा ने 2-2 विकेट लेकर इंग्लैंड की दूसरी पारी को 186 रनों पर समेट दिया। इस ऐतिहासिक दिन की शुरुआत और भी खास तब हो गई जब क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर खुद लॉर्ड्स के मैदान पर पहुंचे और उन्होंने मैच शुरू होने से पहले भारतीय टीम के खिलाड़ियों से बात कर उनका हौसला बढ़ाया।
यादगार विदाई और दोनों पारियों का पूरा लेखा-जोखा
यह मुकाबला भावनाओं से भी सराबोर रहा, क्योंकि यह इंग्लैंड की दिग्गज खिलाड़ी टैमी ब्यूमोंट और हीदर नाइट का आखिरी टेस्ट मैच था। मैच के बाद भारतीय टीम ने खेल भावना का परिचय देते हुए टैमी ब्यूमोंट को शानदार ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर विदा किया। इस पूरे मैच के स्कोरकार्ड पर नजर डालें तो भारत ने पहली पारी में मंधाना के 83, हरमनप्रीत के 58 और दीप्ति के 57 रनों की मदद से 285 रन बनाए थे। जवाब में इंग्लैंड की टीम 170 रन ही बना सकी। इसके बाद भारत ने अपनी दूसरी पारी में यस्तिका भाटिया के 113 और ऋचा घोष के नाबाद 50 रनों की बदौलत 341/7 के स्कोर पर पारी घोषित कर इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 457 रनों का पहाड़ जैसा लक्ष्य रखा था, जिसे हासिल करने में मेजबान टीम पूरी तरह नाकाम रही और भारत ने 270 रनों से मैच अपने नाम कर लिया।